"अपनी भाषा बोलने में गर्व का महसूस होना चाहिए ।" : महाराव इज्यराज सिंह जी
01 May 2022
आखर पोथी-साहित्य की श्रंखला में युवा किशन प्रणय की पुस्तक 'तत्पुरस' का विमोचन ।
युवा साहित्यकार किशन प्रणय की राजस्थानी कविताओं पर साहित्यिक चर्चा का आयोजन रविवार को हुआ । आखर पोथी की शृंखला में होने वाला यह कार्यक्रम सराहनीय रहा । कार्यक्रम की प्रस्तावना ममता 'महक' द्वारा प्रस्तुत की गई । महक ने कहा कि किशन प्रणय की 'तत्पुरस' भाषा, भाव और शिल्प की दृष्टि से विलक्षण है । राजस्थानी भाषा का नया और आधुनिक कवि नये विषयों के साथ आ रहे हैं, कवि समाज के उत्पीड़न और विडम्बना को उकेर रहा हैं । किशन उसी परम्परा के वाहक हैं । तत्पुरुष में राजस्थानी जीवन शैली, शहरी और ग्रामीण जीवन का अंतर, प्रेम, वोट, जीवन की भागदौड़, पक्षियों की उड़ान, गणतंत्र दिवस जैसे सामान्य दिखने वाले विषयों पर गंभीर कविताएँ हैं। इस अवसर पर प्रख्यात आलोचक प्रो. कुंदन माली कहा कि साहित्यकार अपनी भाषा में जो बात कहता है, वह समय और काल की सीमाओं के पार जाता है। किशन प्रणय की नई हाडौती पुस्तक तत्पुरस संस्कारों की पुस्तक है । तत्पुरुष में राजस्थानी जीवन शैली, शहरी और ग्रामीण जीवन का अंतर, प्रेम, वोट, जीवन की भागदौड़, पक्षियों की उड़ान, गणतंत्र दिवस जैसे सामान्य दिखने वाले विषयों पर गंभीर कविताएं है। मुख्य अतिथि महाराव इज्यराज सिंह जी ने इस अवसर पर कहा कि"- साहित्य समाज का आईना होता है । हाडौती भाषा शहरों में कम बोली जा रही है, गाँवो में अधिक बोली जा रही है । हाडौती भाषा में जो साहित्य आ रहा है, वह राजस्थानी भाषा का ही रूप है । अपनी भाषा बोलने में गर्व का महसूस होना चाहिए । समारोह में कवि किशन प्रणय ने अपनी रचना प्रक्रिया के बारे में कहा कि जो मैंने समाज को समझा, वह लिखा । हाडौती भाषा में लिखने का प्रयास किया कि यह भाषा बची रहे । भूमंडलीकरण के दौर में भाषाएँ समाप्त होती जा रही हैं । भाषा के बोलते रहने से यह बची रहेगी । अध्यक्षीय उद्बोधन से बोलते हुए जीतेन्द्र निर्मोही ने कहा कि हाडौती बोली का प्रचार प्रसार अधिक से अधिक किया जाना चाहिए । हाड़ा नरेशों ने काव्य का हमेशा संरक्षण किया है । समकालीन कविता की शुरूआत गौरीशंकर कमलेश के काव्य से हुई है ।
कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापित करते हुए आखर संस्था के सचिव प्रमोद शर्मा ने कहा कि संवाद हमेशा कायम रखना चाहिए, जिससे हमारे बीच में सोहार्द्ध, प्रेम और भाईचारा बना रहे । आखर के माध्यम से राजस्थान के चारों कोने के साहित्यकारों के संवाद को बनाए रखना, यह आखर का उद्देश्य है । भाषा के माध्यम से एक क़ौम जिंदा रहती है । इसलिए अपनी भाषा को जिंदा रखें ।
कार्यक्रम का संचालन युवा समीक्षक विजय जोशी ने किया ।
इस अवसर पर अम्बिकादत्त चतुर्वेदी, गौरीशंकर जोशी, महाकवि किशन वर्मा,
योगेश यथार्थ, डॉ. मोहनलाल, डॉ. नन्दकिशोर महावर, डॉ. के बी भारती, रामकरण प्रभाती, राजेन्द्र पँवार, डॉ. अनिता वर्मा, श्यामा शर्मा, नवलकिशोर महावर, सत्येंद्र वर्मा, सत्यनारायण कोली, सी. एल साँखला, जगदीश भारती, डॉ. रामावतार सागर आदि उपस्थित रहे ।